Sunday, January 22, 2012

एहसास करने दो ज़रा......

इन  बारिश  की  बून्धो  को  छु  लेने  दो  ज़रा ,
हाथ  की  हथेली  में  इन्हें  भरने  दो  ज़रा,
इन गिरती  हुई  बारिश की बूंदों  को महसूस  करने  दो  ज़रा,
हमे  भीग  ने  दो  इन  नन्ही  बूंदों  से  आज  अपने  को  ज़रा.

पानी  से  सने  हुए  मीठी की  सौंधी -सौंधी  खुसबू आज  मेरी  सांसो  में  घुल  जाने  दो  ज़रा
यह  गिरती  हुई  बूंदे  मेरे  पलकों  पर  सुकून  लेके  आया  है, इन  सुकून  को  जी  भर  कर  महसूस  करने  दो  ज़रा,  
कुछ  घंटे  की  ये  यादें   अपने  अन्दर  समां लेने  दो  ज़रा,
क्योंकि कुछ  छंद  के  बाद  ही,  फिर    भागती   हुई  दुनिया में  खो  जाना है,
इस  लिए  कुछ  पल  के  लिए  ही  सही  यह  बारिश  के  एहसास  को  जी  भर  के  जीने  दो  ज़रा.

Happiness can be also be derived from the nature beauty apart from  the materialistic things 
of the world.

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